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टैरिफ लगाकर अमेरिका कर रहा आर्थिक ब्लैकमेल, अर्थशास्त्री बोले- चुनौतियों से निपटने को भारत को झोंकनी होगी पूरी ताकत_我的网站

一 | डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व राज्यसभा सांसद और सिख मामलों के जानकार तिरलोचन सिंह ने 2002 गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (उस वक्त के मुख्यमंत्री) की भूमिका की जमकर सराहना की है। उनका कहना है कि अगर पीएम मोदी ने इस मामले को नहीं संभाला होता तो पूरा गुजरात ही जल गया होता।,न्यूज एजेंसी एएनआई के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्से का नतीजा था और अगर नरेंद्र मोदी ने इसे अच्छे से नहीं संभाला होता तो पूरा गुजरात ही जल गया होता।",उन्होंने कहा, "ट्रेन में जिंदा जले लोगों के शवों को उनके परिजन गांव ले जाकर अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इन लोगों का अंतिम संस्कार वहीं करवा दिया। अगर ये शव गांवों तक पहुंच जाते तो सोचिए क्या होता? कितना गुस्सा भड़कता? पूरा गुजरात ही जल जाता लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा नहीं होने दिया।",सिख नेता ने कहा, "2002 का दंगा जनता के गुस्से से उपजा था और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। मोदी ने इतना बड़ा काम किया किसी ने इसे हाइलाइट नहीं किया।" गौरतलब है कि गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे और तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उनका कहना है कि गुजरात दंगा 1984 में दिल्ली में हुए दंगों की तरह प्रयाजित नहीं थे।,यह भी पढ़ें- 'आपसे कोई खफा है, लेकिन आप संभाल लेंगे'; टैरिफ वॉर के बीच पीएम मोदी से बोले फिजी के प्रधानमंत्री。

二 | आईएएनएस, नई दिल्ली। अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी टैरिफ को आर्थिक ब्लैकमेल की संज्ञा दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि ये टैरिफ भारत को आत्मसंतुष्टि और निर्भरता से मुक्त होने के लिए एक थेरेपी के तौर पर भी काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उद्योग, नीति निर्माता और राजनयिक मिलकर काम करें, तो आज का टैरिफ आतंक कल बदलाव का कारण बन सकता है।,
दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा, आगे का काम मुश्किल है, लेकिन ईमानदारी और ठोस प्रयासों से हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। सिर्फ जरूरत है पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने और पूरी ताक से काम करने की। फिलहाल, दुनिया एक बड़े दांव वाले नाटक को देख रही है। क्या भारत झुकेगा, टूटेगा या फिर वापसी करेगा!,
अमेरिकी टैरिफ की काट को भारत का 'ट्रंप कार्ड'
शुल्क लगाए जाने के बीच सरकार ने वस्त्र निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 50 देशों में विशेष संपर्क कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों को शामिल किया गया है।,
भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है
बता दें कि भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन ये 50 देश मिलकर करीब 590 अरब डॉलर का वैश्विक वस्त्र एवं परिधान आयात करते हैं। इस आयात में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल महज पांच-छह प्रतिशत है।,एक अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा परिदृश्य में इन देशों के साथ विशेष संपर्क की यह पहल बाजार विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है। इसमें भारतीय मिशन और निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) की अहम भूमिका होगी।',
भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर
परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, '25 प्रतिशत शुल्क दर को तो उद्योग ने पहले ही स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में 30-31 प्रतिशत तक घट गई है। इससे भारतीय वस्त्र उद्योग अमेरिकी बाजार से लगभग बाहर हो गया है।'。

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Published on:08:27:24